भगोड़े विजय माल्या को ब्रिटेन की कोर्ट से झटका, रिकवरी का रास्ता खुला

ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या की ब्रिटेन में स्थित संपत्तियों को जब्त करने का रास्ता खोल दिया है। अब 13 भारतीय बैंकों के 9000 करोड़ रुपये के बकाए की वसूली माल्या की ब्रिटेन की मिल्कियत से भी संभव हो सकेगी। इनमें वे संपत्तियां भी शामिल हैं, जहां उसका घर है। माल्या के भारत प्रत्यर्पण के जारी मुकदमे के बीच भारतीय बैंकों के लिए यह बड़ी कामयाबी है।
इस आदेश के जरिए अनुमानित राशि 1.145 अरब पाउंड (करीब दस हजार करोड़ रुपये) की रिकवरी की जा सकेगी। ब्रिटेन के हाईकोर्ट के जज बायरन ने अपने 26 जून के आदेश में कहा है कि उसके अधीन काम करने वाले प्रवर्तन एजेंटों के समेत हाईकोर्ट इंफोर्समेंट (प्रवर्तन) अफसर अब पहले बचाव पक्ष (विजय माल्या) की लेडीवाक, क्वीन हू लेन, टेविन, वेलविन समेत ब्रिटेन स्थित विभिन्न संपत्तियों की जांच के लिए नासिर्फ प्रवेश कर सकती हैं। बल्कि तलाशी के साथ ही उनके साजोसामान को अपने कब्जे में भी ले सकते हैं।
ब्रिटेन की अदालत ने लेडीवाक और ब्रैम्बिल लॉज की सभी बाहरी इमारतों की भी तलाशी और जब्ती के लिए भी आदेश दिए हैं। इस आदेश से ब्रिटिश हाईकोर्ट इंफोर्समेंट अफसर को इस बात की अनुमति मिलती है कि वह 62 वर्षीय माल्या की लंदन के पास स्थित हर्टफोर्डशायर स्थित संपत्तियों में प्रवेश कर सकें। वेल्सिन और टेविन स्थित लेडीवाक और ब्रांबली लॉज में अफसरों का जांच के लिए घुस पाना अपने आप में इसलिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रिटेन में फिलहाल इन्हीं ठिकानों पर विजय माल्या का बसेरा है।
इससे माल्या पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कस जाएगा। ब्रिटिश अफसरों को प्रवेश का अधिकार दिया जाने के शाब्दिक अर्थ से ज्यादा इसके मायने हैं कि अब भारतीय बैंकों के पास यह विकल्प होगा कि वह 1.145 अरब पाउंड (करीब दस हजार करोड़ रुपये) की बकाया राशि को वसूल सकें।
अफसर कर सकते हैं बल प्रयोग
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि प्रवर्तन अधिकारी और एजेंट माल्या की संपत्तियों में प्रवेश के लिए जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग भी कर सकते हैं। इस मामले के कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार हाईकोर्ट की क्वींस बेंच डिविजन के इस आदेश से बैंकों के लिए कई विकल्प खुल गए हैं।
मई के आदेश की अगली कड़ी
यह आदेश ब्रिटेन के ट्रिब्यूनल कोर्ट और इंफोर्समेंट एक्ट 2007 से संबंधित है। साथ ही यह आदेश ब्रिटेन के हाईकोर्ट की मई की व्यवस्था की अगली कड़ी है। विगत मई में हाईकोर्ट ने भारतीय अदालतों के फैसले का समर्थन करते हुए कहा था कि भारतीय बैंकों को अपना बकाया धन वसूलने का हक है। ब्रिटिश हाईकोर्ट ने एक कानूनी मिसाल कायम करते हुए पहली बार ऐसा फैसला दिया जिसमें भारत में डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) के फैसले को बकायदा दर्ज किया गया।
विजय माल्या की अपील लंबित
माल्या ने कोर्ट ऑफ अपील में इस फैसले के खिलाफ अपील करने का आवेदन दिया है। लेकिन उसकी यह अपील फिलहाल लंबित है। कानूनी लड़ाई में एक हद तक विजयी साबित हुए 13 भारतीय बैंकों के समूह में भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, कारपोरेशन बैंक, फेडरल बैंक लिमिटेड, आइडीबीआइ बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, जम्मू और कश्मीर बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, यूको बैंक, युनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और जेएम फाइनेंशियल एसेट रीकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। ताजा फैसले से यह सभी बैंक इंग्लैंड और वेल्स में माल्या की संपत्ति से अपना बकाया वसूल कर पाएंगे।

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