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भारत में राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस
बालिका शिशु के लिये राष्ट्रीय कार्य दिवस के रुप में हर वर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस मनाया जाता है। देश में लड़कियों के लिये ज्यादा समर्थन और नये मौके देने के लिये इस उत्सव की शुरुआत की गयी। समाज में बालिका शिशु के द्वारा सभी असमानताओं का सामना करने के बारे में लोगों के बीच जागरुकता को बढ़ाने के लिये इसे मनाया जाता है। बालिका शिशु के साथ भेद-भाव एक बड़ी समस्या है जो कई क्षेत्रों में फैला है जैसे शिक्षा में असमानता, पोषण, कानूनी अधिकार, चिकित्सीय देख-रेख, सुरक्षा, सम्मान, बाल विवाह आदि।

भारतीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय बालिका विकास मिशन के रुप में राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस मनाने की शुरुआत हुई। लड़कियों की उन्नति के महत्व के बारे में पूरे देश के लोगों के बीच ये मिशन जागरुकता को बढ़ाता है। यह दूसरे सामुदायिक सदस्यों और माता-पिता के प्रभावकारी समर्थन के द्वारा निर्णय लेने की प्रक्रिया में लड़कियों के सार्थक योगदान को बढ़ाता हे।

राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस 2020
राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस 24 जनवरी 2020 में शुक्रवार को मनाया जायेगा।

राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस क्यों मनाया जाता है

समाजिक लोगों के बीच उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिये और समाज में लड़कियों की स्थिति को बढ़ावा देने के लिये इसे मनाया जाता है। ये बहुत जरुरी है कि विभिन्न प्रकार के समाजिक भेदभाव और शोषण को समाज से पूरी तरह से हटाया जाये जिसका हर रोज लड़कियाँ अपने जीवन में सामना करती हैं। समाज में लड़कियों के अधिकारों की जरुरत के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिये एक समान शिक्षा और मौलिक आजादी के बारे में विभिन्न राजनीतिक और समुदायिक नेता जनता में भाषण देते हैं।

राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस
लड़कियों के लिये ये बहुत जरुरी है कि वो सशक्त, सुरक्षित और बेहतर माहौल प्राप्त करें। उन्हें जीवन की हर सच्चाई और कानूनी अधिकारों से अवगत होना चाहिये। उन्हें इसकी जानकारी होनी चाहिये कि उनके पास अच्छी शिक्षा, पोषण, और स्वास्थ्य देख-भाल का अधिकार है। जीवन में अपने उचित अधिकार और सभी चुनौतियों का सामना करने के लिये उन्हें बहुत अच्छे से कानून सहित घरेलु हिंसा की धारा 2009, बाल-विवाह रोकथाम एक्ट 2009, दहेज रेकथाम एक्ट 2006 आदि से अवगत होना चाहिये।

हमारे देश में, महिला साक्षरता दर अभी भी 53.87% है और युवा लड़कियों का एक-तिहाई कुपोषित हैं। स्वास्थ्य सेवा तक सीमित पहुँच और समाज में लैंगिक असमानता के कारण विभिन्न दूसरी बीमारियों और रक्त की कमी से प्रजननीय उम्र समूह की महिलाएँ पीड़ित हैं। विभिन्न प्रकार की योजनाओं के द्वारा बालिका शिशु की स्थिति को सुधारने के लिये महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर बहुत सारे कदम उठाये गये हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने “धनलक्षमी” नाम से एक योजना की शुरुआत की है जिसके तहत बालिका शिशु के परिवार को नकद हस्तांतरण के द्वारा मूलभूत जरुरतों जैसे असंक्रमीकरण, जन्म पंजीकरण, स्कूल में नामांकन और कक्षा 8 तक के रखरखाव को पूरा किया जाता है। शिक्षा का अधिकार कानून ने बालिका शिशु के लिये मुफ्त और जरुरी शिक्षा उपलब्ध कराया गया है।

राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस कैसे मनाया जाता है
समाज में लड़कियों की स्थिति को बढ़ावा देने के लिये बालिका शिशु दिवस मनाने के लिये पूरे देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। भारतीय समाज में लड़कियों की ओर लोगों की चेतना बढ़ाने के लिये एक बड़ा अभियान भारतीय सरकार द्वारा आयोजित किया जाता है।

राष्ट्रीय कार्य के रुप में मनाने के लिये 2008 से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस मनाने की शुरुआत हुई। इस अभियान के द्वारा भारतीय समाज में लड़कियों के साथ होने वाली असमानता को चिन्हित किया है। इस दिन, “बालिका शिशु को बचाओ” के संदेश के द्वारा और रेडियो स्टेशन, टीवी, स्थानीय और राष्ट्रीय अखबार पर सरकार द्वारा विभिन्न विज्ञापन चलाएँ जाते हैं। एनजीओ संस्था और गैर-सरकारी संस्था भी एक साथ आते हैं और बालिका शिशु के बारे में सामाजिक कलंक के खिलाफ लड़ने के लिये इस उत्सव में भाग लेते हैं।

राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस मनाने का उद्देश्य
समाज में बालिका शिशु के लिये नये मौके देता है और लोगों की चेतना को बढ़ाने के लिये राष्ट्रीय कार्य के रुप में इसे मनाया जाता है। भारतीय समाज के बालिका शिशुओं के द्वारा सामना किये जा रहे है असमानता को हटाना।

ये सुनिश्चित किया जाये कि भारतीय समाज में हर बालिका शिशु को उचित सम्मान और महत्व दिया जा रहा है।

ये सुनिश्चित किया जाये कि देश में हर बालिका शिशु को उसके सभी मानव अधिकार मिलेंगे।

भारत में बाल लिंगानुपात के खिलाफ कार्य करना तथा बालिका शिशु के बारे में लोगों का दिमाग बदलना है।

बालिका शिशु के महत्व और भूमिका के बारे में जागरुकता बढ़ाने के द्वारा बालिका शिशु की ओर दंपत्ति को शुरुआत करनी चाहिये। उनके स्वास्थ्य, सम्मान, शिक्षा, पोषण आदि से जुड़े मुद्दों के बारे में चर्चा करना।

भारत में लोगों के बीच लिंग समानता को प्रचारित करना।

भारत में बालिका शिशु के अधिकार
बालिका शिशु की स्थिति को बेहतर बनाने के लिये विभिन्न घोषणा के द्वारा भारतीय सरकार ने विभिन्न कदम उठाये। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

गर्भावस्था में क्लिनिकों के द्वारा लिंग पता करने को सरकार द्वारा गैर कानूनी करार दिया गया है।

बाल विवाह निषेध है।

कुपोषण, अशिक्षा, गरीबी और समाज में शिशु मृत्यु दर से लड़नें के लिये सभी गर्भवती महिलाओं के लिये प्रसवपूर्व देख-रेख को जरुरी बना दिया है।

बालिका शिशु को बचाने के लिये सरकार द्वारा “बालिका शिशु को बचाओ” योजना की शुरुआत की गयी है।

मुफ्त और आवश्यक प्राथमिक स्कूल के द्वारा भारत में बालिका शिशु शिक्षा की स्थिति में सुधार हुआ है।

भारत में बालिका शिशु की स्थिति को सुधारने के लिये महिलाओं के लिये स्थानीय सरकार में एक-तिहाई सीट भारतीय सरकार ने आरक्षित रखी है।

महिलाओं की स्थिति और रोजगार के मौंके को बढ़ाने के लिये कानून द्वारा एमटीपी विरोधी, सती कानून विरोधी, दहेज विरोधी एक्ट भी लाया गया है।

देश के पिछड़े राज्यों में शिक्षा की स्थिति की ओर ध्यान दिलाने के लिये पंचवर्षीय योजना को लागू किया गया है।

स्कूली बच्चों को यूनिफार्म, दोपहर का खाना, शैक्षणिक वस्तु दी जाती है तथा एससी और एसटी जाति के लड़कियों के परिवारों को धन वापसी किया जाता है।

प्राथमिक स्कूलों को जाना और छोटी बच्चियों का ध्यान देने के लिये बलवड़ी-कम-पालना घर को लागू कर दिया गया है।

स्कूल सर्विस को उन्नत बनाने और शिक्षकों की शिक्षा के लिये “ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड” सहित दूसरे कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं।

पिछड़े इलाकों की लड़कियों की आसानी के लिये मुक्त शिक्षा व्यवस्था की स्थापना की गयी है।

बालिका शिशु के लिये ये घोषित किया गया है कि उनके लिये मौकों को और बढ़ाने के लिये “लड़कियों के साथ बराबरी का व्यवहार और मौके दिये जाने चाहिये”।

ग्रामीण इलाकों की लड़कियों के लिये बेहतर जीवन बनाने के लिये मुख्य नीति के रुप में सरकार द्वारा स्वयं सहायता समूह को आरंभ किया है।

राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस की थीम (विषय)
1) वर्ष 2017 में राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस के लिए थीम "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (BBBP)" था।

2) वर्ष 2018 में राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस के लिए थीम "एक लड़की एक फूल है, कांटा नहीं" था।

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